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आयुर्वेद विश्वविद्यालय बना मनमानी का अड्डा।* 

हमेशा विवादों में रहने वाला उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय में एक नया विवाद खड़ा हो गया है । विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ० सुनील जोशी द्वारा शासकीय नियमों का उल्लंघन कर दूषित भावना से एकतरफा निर्णय लिए जा रहे हैं। ताजा मामला माननीय उच्च न्यायालय, नैनीताल में योजित अवमानना वाद संख्या  संख्या 348 /2022  की  सुनवाई में कुलपति द्वारा माननीय उच्च  न्यायालय को अवगत कराया कि कि  उनका कुलपति पद का कार्यकाल  03 माह से भी कम रह गया है अतएव वे नियमानुसार कोई भी नीतिगत निर्णय नहीं ले सकते। इसके विपरीत कुलपति के अनुमोदन से प्रभारी कुलसचिव डॉ अनूप कुमार गक्खड़ द्वारा डॉ आलोक कुमार श्रीवास्तव की पदोन्नति हेतु प्राप्त आवेदन/ प्रत्यावेदन को अपने आदेश दिनांक 20 जून 2023 के द्वारा  निरस्त कर दिया गया है। इससे स्पष्ट होता है  विश्वविद्यालय में मनमानी चल रही है एवं साथ ही नियमों का मखौल उड़ाया जा रहा है इसका ताजा उदाहरण विश्वविद्यालय के दो कर्मियों के विरुद्ध जांच उन लोगों से कराई जा रही है जो पहले से ही विवादित रहे हैं।

वहीं दूसरे घटनाक्रम में संविदा कर्मी डॉ० संजय गुप्ता जिसे पूर्व में रामजी शरण शर्मा तत्कालीन कुलसचिव द्वारा विश्वविद्यालय से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया था उसे अवैध रूप से डॉ० सुनील जोशी द्वारा उप कुल सचिव के पद पर नियुक्त करते हुए भ्रष्टाचार की सारी सीमाएं लांघ दी है, हद तो तब हो गई जब कुलपति द्वारा उन्हें प्रोफेसर के पद पर अवैध रूप से विनियमित किए जाने के संबंध में परिसर निदेशक ऋषिकुल से प्रस्ताव प्राप्त किया है।

Samarth Bharat News

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